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: संत सियाराम बाबा का निधन, मां नर्मदा के तट पर ली अंतिम सांस, देश भर से भक्तों में शोक की लहर

Barkat Qureshi / Wed, Dec 11, 2024 / Post views : 362

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संत सियाराम बाबा का निधन, मां नर्मदा के तट पर ली अंतिम सांस, देश भर से भक्तों में शोक की लहर   संत सियाराम बाबा पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। संत सियाराम बाबा का आज मोक्षदा एकादशी ओर गीता जयंती के पावन दिन पर सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर प्रभु मिलन हो गया है। मूंदी के वरिष्ठ साहित्यकार व शिक्षक सीताराम मालाकर जो कि बाबा सियाराम के बहुॅत बडे भक्त थे उन्होने संत सियाराम बाबा के प्रभु मिलन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि मां नर्मदा तट का एक दीप आज बहम तत्व में लीन हो गया है। संत सियाराम बाबा मां नर्मदा तट के एक वट वृक्ष और एक दीप थे, जिन्होंने शीतल छाया और ज्ञान के फल जगत को दीए। उनकी तुलना नर्मदा तट पर प्रज्ज्वलित उस दीप से कर सकते हैं, जिसे संसारिक हवा आंधी बुझा न पायी । ऐसे संत का परम धाम कों प्राप्त होना ब्रह्म तत्व में लीन होना।हम सब के लिए आस्था और श्रद्धा की बात है । ओर बताया कि सीयाराम बाबा हमेशा रामायण का पाठ करते थे.संत सियाराम बाबा ने नर्मदा किनारे अपने आश्रम बनाया। बाबा ने बारह वर्षों तक मौन भी धारण कर रखा था। जो भक्त आश्रम में उनसे मिलने आता था और ज्यादा दान देना चाहता था तो वे इनकार कर देते थे। वे सिर्फ दस रुपये का नोट ही लेते थे। उस धनराशि का उपयोग भी वे आश्रम से जुड़े कामों में लगा देते थे। नर्मदा के घाटों के निर्माण के लिए भी उन्होंने बड़ी राशि दान की थी। बाबा ने नर्मदा नदी के किनारे एक पेड़ के नीचे तपस्या की थी और बारह वर्षों तक मौन रहकर अपनी साधना पूरी की थी। मौन व्रत तोड़ने के बाद उन्होंने पहला शब्द सियाराम बाबा कहा तो भक्त उन्हें उसी नाम से पुकारने लगे थे।

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